इसमें शंका काहें का मालिक
रिश्ता वही जो स्वाभाविक
भाई तो साझेदार दोस्त
बहन से खटमिठ्ठी नोकझोंक
पापा से मैं शरारत और
मम्मी से नादानी करता हूँ
मैं आदमी नहीं मैं लड़का हूँ
जीता नहीं उसपे मरता हूँ
महबूबा से इज़हार मैं
डंके की चोट पे करता हूँ
जब जब आज़माया उसने
तब तब उसके सीने में
मैं बहुत ज़ोर से धड़का हूँ
मैं आदमी नहीं मैं लड़का हूँ
दोस्तों से यारी
मतलब भरपूर दिलदारी
देख जिसे दिल जाये खिल
असली दोस्त वही जो दरियादिल
राज़दारी जो बिना शर्त
ऐसा रिश्ता जो बिना पर्त
क़मीनों ने जब भी याद किया
बेधड़क मैं आ धमका हूँ
मैं आदमी नहीं मैं लड़का हूँ
बेवज़ह मौज़ बेवज़ह मस्ती
वजह ढूंढ़ूँ मैं वो नहीं हस्ती
चिंता की ज़्यादे ज़िकर नहीं
आज में जीता हूँ कल की फ़िकर नहीं
मन में है जो ज़ुबान से मैं वो
बिल्कुल खुलकर कहता हूँ
जगाने की तनिक भी ज़रूरत नहीं
मैं हरदम जोश में रहता हूँ
मैं आदमी नहीं मैं लड़का हूँ

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