June 16, 2026
Chicago 12, Melborne City, USA
कविताएँ

मैं आदमी नहीं मैं लड़का हूँ

इसमें शंका काहें का मालिक
रिश्ता वही जो स्वाभाविक
भाई तो साझेदार दोस्त
बहन से खटमिठ्ठी नोकझोंक
पापा से मैं शरारत और
मम्मी से नादानी करता हूँ
मैं आदमी नहीं मैं लड़का हूँ

जीता नहीं उसपे मरता हूँ
महबूबा से इज़हार मैं
डंके की चोट पे करता हूँ
जब जब आज़माया उसने
तब तब उसके सीने में
मैं बहुत ज़ोर से धड़का हूँ
मैं आदमी नहीं मैं लड़का हूँ

दोस्तों से यारी
मतलब भरपूर दिलदारी
देख जिसे दिल जाये खिल
असली दोस्त वही जो दरियादिल
राज़दारी जो बिना शर्त
ऐसा रिश्ता जो बिना पर्त
क़मीनों ने जब भी याद किया
बेधड़क मैं आ धमका हूँ
मैं आदमी नहीं मैं लड़का हूँ

बेवज़ह मौज़ बेवज़ह मस्ती
वजह ढूंढ़ूँ मैं वो नहीं हस्ती
चिंता की ज़्यादे ज़िकर नहीं
आज में जीता हूँ कल की फ़िकर नहीं
मन में है जो ज़ुबान से मैं वो
बिल्कुल खुलकर कहता हूँ
जगाने की तनिक भी ज़रूरत नहीं
मैं हरदम जोश में रहता हूँ
मैं आदमी नहीं मैं लड़का हूँ

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