creativefitrat.com Blog अंदाज़ - ए - original बेवजह खामख़ा
अंदाज़ - ए - original कविताएँ

बेवजह खामख़ा

ज़मीं हो तुम
आसमाँ हो तुम
मंजिल तुम ही हो
कारवाँ हो तुम

तुम्हारे लिए मैं
लुटने को तैयार हूँ
तुम्हारे लिए मैं
मिटने को तैयार हूँ

पर जान की मेरी
जो परवाह करती
वो माँ कह रही
बेवजह खामख़ा हो तुम

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