June 16, 2026
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कविताएँ

मुझे ए आई ( AI Artificial Intelligence ) नहीं, माई ( Mother ) चाहिए

मुझे ए आई ( AI Artificial Intelligence ) नहीं, माई ( Mother ) चाहिए

माँ कठिन राह को चुनती थी
कपड़े हाथों से बुनती थी
वो सुई धागा, वो ऊन के गोले
माँ की ममता मन से बोले
कि जबसे ऑनलाइन का चलन है आया
वास्तव में वास्तविकता में खलन है लाया
मुझे कपड़े ऑनलाइन नहीं
माँ के हाथों वाली बुनाई चाहिए
मुझे ए आई नहीं, माई चाहिए

रिश्ते जो अब हैं रील के क़ायल
पता नहीं, कौन है ख़ुश, कौन है घायल
मुझे रील वाली नहीं
रियल वाली मिलन और जुदाई चाहिए
मुझे ए आई नहीं, माई चाहिए

मन में जागी कोई जिज्ञासा
फट से चैट जीपीटी या गूगल पे मिल जाता
ना कोई वार्तालाप, ना जाप हुई
ये भी भला कोई बात हुई
मुझे तो जिज्ञासा भरी पढ़ाई चाहिए
मुझे ए आई नहीं, माई चाहिए

ये व्हाट्सएप फेसबुक का अलग तमाशा
लिखो कुछ, पढ़ा कुछ जाता
पढ़ने वाला अपने मूड के मुताबिक़
तरह तरह के मतलब बनाता
क्षणभर के लिए बहने वाली नहीं
मुझे तो रॉक सॉलिड वाली शुभकामनाएँ और बधाई चाहिए
मुझे ए आई नहीं, माई चाहिए

स्विगी ज़ोमैटो का खेल तो देखो
इतने ऑप्शंस खाने के, कुछ भी लेलो
थाली को तो खूब सजाती
पर कितना भी खाओ, मन को ना भाती
मुझे तो वही, माँ के हाथों
धीमी आँच पे बनी रबड़ी
के ऊपर जमी मलाई चाहिए
मुझे ए आई नहीं, माई चाहिए

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