हद से ज्यादा ख़बसूरतू
बेहिसाब बेकसूर हो तुम
कुदरत ने जिसे तराशा
ऐसी नूर हो तुम
बेहिचक तुझे देखता रहूँ
ऐसी हूर हो तुम
मेरी अमानत मेरा गुरूर मेरा सुकून हो तुम
हर लम्हा हर पल ये कहता है
तेरी दिल की समुंदर में मेरा लहू बेहता है
जो कभी ख़तम ना हो, मेरी आशिकी का वो सुरूर हो तुम
मेरी अमानत मेरा गुरूर मेरा सुकून हो तुम
तेरे मुस्कुराने की वज़ह बरकत करती रहे
मेरी ज़न्दगी कि धपू में, तेरे रूह कि छांव पड़ती रहे
मेरी जवानी कि जज़्बातों का जुनून हो तुम
मेरी अमानत मेरा गुरूर मेरा सुकून हो तुम
हद से ज्यादा ख़बसूरतू
बेहिसाब बेकसूर हो तुम
कुदरत ने जिसे तराशा
ऐसी नरू हो तुम
बेहिचक तुझे देखता रहूँ
ऐसी हो तुम
मेरी अमानत मेरा गुरूर मेरा सुकून हो तुम

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