तुम मुझे खून दो
तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें ….ये नेताजी के बोल थे,जो अमर थे, बेजोड़ थे .. पर अब हमें खून की ज़रूरत नहीं,एक
तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें ….ये नेताजी के बोल थे,जो अमर थे, बेजोड़ थे .. पर अब हमें खून की ज़रूरत नहीं,एक
एक गाँव है मेराक्या तुम्हे हल्की सी भी भनक हैहर कदम है जो मेरा, उस मिट्टी की ही सनक है…. मज़हब वहीं कहीं
कभी ख़तम ना होंगी शिकायतें अपनीबेवजह पाल जो रखी हैं चाहतें इतनी थमने की अब गुंजाईश नहींचाहतों में रम जो गई हैं गुज़ारिशें
जब भी मेरी याद आएतो चाय पी लेनाज़्यादा याद आएतो अदरक ज़्यादे रखनाजज़्बात डाल दोगेतो महक भी आएगीतुम उस महक को शिद्दत से
किस क़िरदार से नवाज़ा जाए हमें ज़िद्दी जो अपनी बात पे अड़ा रहता हैया आज्ञाकारी जो हाथ जोड़के खड़ा रहता है मनमौज़ी जो
ज़मीं हो तुमआसमाँ हो तुममंजिल तुम ही होकारवाँ हो तुम तुम्हारे लिए मैंलुटने को तैयार हूँतुम्हारे लिए मैंमिटने को तैयार हूँ पर जान
इसमें शंका काहें का मालिकरिश्ता वही जो स्वाभाविकभाई तो साझेदार दोस्तबहन से खटमिठ्ठी नोकझोंकपापा से मैं शरारत औरमम्मी से नादानी करता हूँमैं आदमी
Hum Hindustaniyon ko bas ek bahaana chahiye, Bahaana jashn ka. Jashn ho tyohaar ka, Ya badhte vyapaar ka. Doston ke milne pe jashn,