creativefitrat.com Blog कविताएँ अंजान हैं अपनों से
कविताएँ

अंजान हैं अपनों से

अंजान हैं अपनों से
पर सबकी खबर चाहिए

रंजिश हवा में तैर रहे
दुआओं में असर चाहिए

मजमा लगा विचारों का
अपनाने का जिगर चाहिए

इश्क़ हर तरफ बेशुमार
बस परखने की नज़र चाहिए

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