October 16, 2026
कविताएँ

अभी ग़ालिब हूं मैं

कभी फ़िराक कभी मीर
कभी बेलगाम कमान से निकली हुई तीर
कभी हरिवंश, कभी दिनकर
घूमता फिरता बिंदास बनकर
कभी फ़ैज़ कभी साहिर
मौज़ में अव्वल दर्जे का माहिर
दावा करोगे तो ख़ारिज हूं मैं
पर अभी छेड़ो ना मुझे
अभी ग़ालिब हूं मैं

Leave feedback about this

  • Quality
  • Price
  • Service

PROS

+
Add Field

CONS

+
Add Field
Choose Image
Choose Video