कभी फ़िराक कभी मीर
कभी बेलगाम कमान से निकली हुई तीर
कभी हरिवंश, कभी दिनकर
घूमता फिरता बिंदास बनकर
कभी फ़ैज़ कभी साहिर
मौज़ में अव्वल दर्जे का माहिर
दावा करोगे तो ख़ारिज हूं मैं
पर अभी छेड़ो ना मुझे
अभी ग़ालिब हूं मैं
कभी फ़िराक कभी मीर
कभी बेलगाम कमान से निकली हुई तीर
कभी हरिवंश, कभी दिनकर
घूमता फिरता बिंदास बनकर
कभी फ़ैज़ कभी साहिर
मौज़ में अव्वल दर्जे का माहिर
दावा करोगे तो ख़ारिज हूं मैं
पर अभी छेड़ो ना मुझे
अभी ग़ालिब हूं मैं