October 16, 2026
कविताएँ

थोड़ा सा तू दीवाना

छवि अपनी तू धूल कर
दुनियादारी को भूल कर
थोड़ा सा विचलित कर अपना ये मन
हर पल में है कुछ अपनापन
भंवरा बन बगिया में घूम
नेकी कर मस्ती में झूम
आज ना आयेगा कल
तू ठाठ से चल, आंखें मत मल
लोगों का तू डर मत रख
बकने वाले तो बकेंगे सब
अपनी ही तू लय में बढ़
मनमौजी से तू सपने गढ़
एक ही तो है ये छोटी सी
काट नहीं, तू ज़िन्दगी जी
सब समझ रहा तू, फर्जी का है ये भोलापन
थोड़ा सा तू दीवाना बन, थोड़ा सा तू आवारा बन
थोड़ा सा तू दीवाना बन, थोड़ा सा तू आवारा बन

Leave feedback about this

  • Quality
  • Price
  • Service

PROS

+
Add Field

CONS

+
Add Field
Choose Image
Choose Video