पहचान

पहचान

हम लिखते हैं,

हम लिखते हैं,
राम की सोच के बारे में,
रावण के विरोध के बारे में ।

हम लिखते हैं,
रिश्तों की गहराई के बारे में,
आंगन की चारपाई के बारे में ।

हम लिखते हैं,
सदी की चाल के बारे में,
जी के जंजाल के बारे में ।

हम लिखते हैं,
महत्वाकांक्षा और जड़ के बारे में,
संतुलन से हल के बारे में ।

हम लिखते हैं,
भागती हुई दुनिया के बारे में,
जागती हुई माँ के बारे में ।

हम लिखते हैं,
देश के विकास के बारे में,
द्वेष से विनाश के बारे में ।

हम लिखते हैं,
गली और नुक्कड़ के बारे में,
चाय और चुक्कड़ के बारे में ।

हम लिखते हैं,
स्वास्थ्य की प्राथमिकता के बारे में,
उसके प्रती जागरूकता के बारे में ।

हम लिखते हैं,
ज़मीनी सोच के बारे में,
आसमानी जोश के बारे में ।

हम लिखते हैं,
यहाँ और वहाँ के बारे में,
सारे जहाँ के बारे में ।

हम लिखते हैं,
ना जाने क्या करने के लिए,
शायद वास्तविकता बयां करने के लिए ।

हम लिखते हैं,
क्योंकि हम रचनात्मक हैं,
कलम के आगे नतमस्तक हैं ।

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