June 16, 2026
Chicago 12, Melborne City, USA
कविताएँ

मुहल्ले के दोस्त

कुछ मुहल्ले के दोस्त थे
तबियत से खुशमिजाज
जशन में मगन

और अपनी ही धुन में सारे वो मदहोश थे
ऐसे ही मेरे कुछ मुहल्ले के दोस्त थे

दाना पानी भी था साथ
उठना बैठना भी था साथ
सुनहरे बचपन में उनका भी था हाथ
सीटियाबाजी में माहिर और सैर सपाटे के वो स्नोत थे
वही कुछ मुहल्ले के दोस्त थे

वो चौक के समोसे, कुल्हड़ की चाय और मीठी लस्सी
बांध रखी थी इक ऐसी हमें रस्सी
साथ ये छूटेना, ऐसे कुछ हमारे सोच थे
यारों के यार वो मुहल्ले के दोस्त थे

मटरगश्ती बहुत की, हम सयाने थे
पास हमारे हंसी के सौ बहाने थे
किसी ना किसी बहाने मिलते हम रोज़ थे
सोसायटी के नहीं, हम मुहल्ले के दोस्त थे

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