October 16, 2026
कविताएँ

वो जो बेटी है ना

वो एक दिशा है एक उत्साह है, एक पर्व है
सोचो तो प्यार समझो तो गर्व है

वो एक दिया है अंधेरों को चीरती है
खुद जलकर रोशनी बिखेरती है

वो एक पहेली है एक मिसाल है
परख के देखलो वो बेमिसाल है

वही हमारा कल थी वही हमारा आज है
वो जो बेटी है ना वही दुनिया का ताज है

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