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कविताएँ

वो जो बेटी है ना

वो एक दिशा है एक उत्साह है, एक पर्व है
सोचो तो प्यार समझो तो गर्व है

वो एक दिया है अंधेरों को चीरती है
खुद जलकर रोशनी बिखेरती है

वो एक पहेली है एक मिसाल है
परख के देखलो वो बेमिसाल है

वही हमारा कल थी वही हमारा आज है
वो जो बेटी है ना वही दुनिया का ताज है

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