एक गाँव है मेरा
क्या तुम्हे हल्की सी भी भनक है
हर कदम है जो मेरा, उस मिट्टी की ही सनक है….
मज़हब वहीं कहीं छिपी है मेरी
गज़ब सी लिपि वहीं की है मेरी
एक गाँव है मेरा
क्या तुम्हे हल्की सी भी भनक है
हर कदम है जो मेरा, उस मिट्टी की ही सनक है….
एक गाँव है मेरा
क्या तुम्हे हल्की सी भी भनक है
हर कदम है जो मेरा, उस मिट्टी की ही सनक है….
मज़हब वहीं कहीं छिपी है मेरी
गज़ब सी लिपि वहीं की है मेरी
एक गाँव है मेरा
क्या तुम्हे हल्की सी भी भनक है
हर कदम है जो मेरा, उस मिट्टी की ही सनक है….