June 16, 2026
Chicago 12, Melborne City, USA
कविताएँ

वो जो लकड़ी के कुर्सी

वो जो लकड़ी के कुर्सी और मेज पड़े हैं बरांदे में
उनकी अहमियत कबतक टाल पाएंगे

वो जो पेड़ लगाया था छोटे से लॉन में
उनकी छाव से कब तक भाग पाएंगे

लालटेन और मोमबत्ती से रोशनियां जो आती थीं
रात के अंधेरे को चीर कर उजाला सा कर जाती थीं

छोटा सा मंदिर जो बनाया था अपने आशियाने में
मलाल सा रह गया है फिर से उसे पाने में

वो जो मुजैक से फर्श बने थे कमरों में
उसपे कुछ गंदे परत से जम गए हैं
लगता है इधर हम अपने घर बहुत कम गए हैं

सवाल पूछने कुछ मेरे मन के भ्रम गए हैं
जल्द जवाब आ जाएगा उनका
तबतक कुछ और दुनियादारी सा कर ले
कुछ और अपनी ज़िन्दगी से मारा मारी सा करलें

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