October 16, 2026
कविताएँ

मैं मरा नहीं , मैं ज़िंदा हूं

( Tribute to my father on his death anniversary ) गोरखपुर के रूस्तमपुर, चौरहिया गोला, दीवान बाज़ार का बाशिंदा हूं मैं मरा नहीं , मैं ज़िंदा हूं मैं आज में हूं , मैं कल में हूं मैं संध्या के हर पल में हूं अपने बेटे बहुओं का हिस्सा हूं जो कभी छुपा नहीं वो किस्सा

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कविताएँ

तुम मुझे खून दो

तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें ….ये नेताजी के बोल थे,जो अमर थे, बेजोड़ थे .. पर अब हमें खून की ज़रूरत नहीं,एक बूँद की भी ज़रूरत नहीं.. आज़ाद जो हैं हम ??आबाद जो हैं हम ?? अब खून की नहीं,जुनून की ज़रूरत है .. जुनून,अपनी संस्कृति पे नाज़ करने का,जागो, समय गया अब लाज

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गाने

मिट्टी की ही सनक है

एक गाँव है मेराक्या तुम्हे हल्की सी भी भनक हैहर कदम है जो मेरा, उस मिट्टी की ही सनक है…. मज़हब वहीं कहीं छिपी है मेरीगज़ब सी लिपि वहीं की है मेरी एक गाँव है मेराक्या तुम्हे हल्की सी भी भनक हैहर कदम है जो मेरा, उस मिट्टी की ही सनक है….

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कविताएँ

khaamkha chhod di

कभी ख़तम ना होंगी शिकायतें अपनीबेवजह पाल जो रखी हैं चाहतें इतनी थमने की अब गुंजाईश नहींचाहतों में रम जो गई हैं गुज़ारिशें अपनी इश्क़ के मंसूबे भी अब पाक नहींकिसी मकसद से हो रही हैं इबादतें अपनी अनंत हैं, ना कभी पूरी हो सकेंगी ख्वाहिशें अपनीख़ामख़ा छोड़ दी जिनके लिए हमने आबाई रिहाईशें अपनी….

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गाने

chai aur yaad

जब भी मेरी याद आएतो चाय पी लेनाज़्यादा याद आएतो अदरक ज़्यादे रखनाजज़्बात डाल दोगेतो महक भी आएगीतुम उस महक को शिद्दत से चखना गर मुझसे कोई गिले-शिकवे होंतो भी जीभ ना जला लेनातुम बस चाय के मज़े लेनाजब मिलूँगातब सारे गिले-शिकवे मिटा लेना जब मुझे तुम्हारी याद आएगीमैं भी चाय पी लूंगामैं ज़्यादे अदरक

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कविताएँ

किस क़िरदार से नवाज़ा जाए हमें

किस क़िरदार से नवाज़ा जाए हमें ज़िद्दी जो अपनी बात पे अड़ा रहता हैया आज्ञाकारी जो हाथ जोड़के खड़ा रहता है मनमौज़ी जो नए अनुभवों का शौकीन हैया गंभीर जो गहरी सोच में विलीन है मज़बूर जो बेचारा सा बना फिरता हैया मजबूत जो सबका सहारा बना फिरता है दीवाना जो मदहोशी के आलम में

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बेवजह खामख़ा

ज़मीं हो तुमआसमाँ हो तुममंजिल तुम ही होकारवाँ हो तुम तुम्हारे लिए मैंलुटने को तैयार हूँतुम्हारे लिए मैंमिटने को तैयार हूँ पर जान की मेरीजो परवाह करतीवो माँ कह रहीबेवजह खामख़ा हो तुम

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कविताएँ

मैं आदमी नहीं मैं लड़का हूँ

इसमें शंका काहें का मालिकरिश्ता वही जो स्वाभाविकभाई तो साझेदार दोस्तबहन से खटमिठ्ठी नोकझोंकपापा से मैं शरारत औरमम्मी से नादानी करता हूँमैं आदमी नहीं मैं लड़का हूँ जीता नहीं उसपे मरता हूँमहबूबा से इज़हार मैंडंके की चोट पे करता हूँजब जब आज़माया उसनेतब तब उसके सीने मेंमैं बहुत ज़ोर से धड़का हूँमैं आदमी नहीं मैं

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Jashn Sehat Ka

Hum Hindustaniyon ko bas ek bahaana chahiye,  Bahaana jashn ka. Jashn ho tyohaar ka, Ya badhte vyapaar ka. Doston ke milne pe jashn, Salary ke badhne pe jashn. School ke puraane batch ka jashn, India-Pakistan match ka jashn. Bachchan ke bol pe jashn, Messi ke goal pe jashn. Baba ke achchhe salaah pe jashn, Dadi

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पहचान

पहचान

हम लिखते हैं, हम लिखते हैं,राम की सोच के बारे में,रावण के विरोध के बारे में । हम लिखते हैं,रिश्तों की गहराई के बारे में,आंगन की चारपाई के बारे में । हम लिखते हैं,सदी की चाल के बारे में,जी के जंजाल के बारे में । हम लिखते हैं,महत्वाकांक्षा और जड़ के बारे में,संतुलन से हल

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