गाने

chai aur yaad


जब भी मेरी याद आए
तो चाय पी लेना
ज़्यादा याद आए
तो अदरक ज़्यादे रखना
जज़्बात डाल दोगे
तो महक भी आएगी
तुम उस महक को शिद्दत से चखना

गर मुझसे कोई गिले-शिकवे हों
तो भी जीभ ना जला लेना
तुम बस चाय के मज़े लेना
जब मिलूँगा
तब सारे गिले-शिकवे मिटा लेना

जब मुझे तुम्हारी याद आएगी
मैं भी चाय पी लूंगा
मैं ज़्यादे अदरक वाली पीता हूँ
जज़्बात जो डालता हूँ
इसलिए महक भी ख़ूब आती है
मैं उस महक को चख कर जीता हूँ

मुझे तुमसे कोई गिले-शिकवे नहीं है
इसलिए मेरी जीभ कभी नहीं जलती
ज़िंदगी के मज़े धीमे धीमे लेता हूँ
इसलिए चाय भी धीमे धीमे पीता हूँ

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